मेडिकल गर्ल्ज़ हॉस्टल-1

Medical Girls Hostel-1

दोस्तो, मेरा नाम नीलिमा है। आप सभी को मेरा नमस्कार। मेरी उम्र 24 वर्ष है। मैं मुंबई में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हूँ। मेरा घर दिल्ली में है, मुंबई में मैं कॉलेज के होस्टल में रहती हूँ। मैं बहुत खूबसूरत तो नहीं हूँ लेकिन एक खूबसूरत जिस्म की मलिका हूँ। मेरा रंग यूं तो गेहुँवा है, मगर भगवान ने मेरे जिस्म को तराश तराश के बनाया है। मेरी फिगर 36-28-32 है। मेरे स्तनों का आकार ऐसा है कि मेरी सूरत से पहले वे ही लड़कों का ध्यान आकर्षित कर लेते हैं।

दोस्तो, आपसे एक गहन समस्या के बारे में सुझाव चाहती हूँ, आप मुझे मेल करे कि क्या मैंने सही किया या गलत।

बात उन दिनों की है, जब मैं फर्स्ट ईअर पास करके एम बी बी एस सेकेंड ईअर में आ गई, तब मैंने गर्ल्स हॉस्टल में शिफ्ट कर लिया। फर्स्ट ईअर तक मैं अपनी मौसी के घर रहती थी। होस्टल में मेरी अन्य सीनियर लड़कियों से मित्रता हुई। उन सभी के बोयफ़्रेंड थे। अक्सर वे छुट्टी के दिन वार्डन से बहाना करके होस्टल से पूरी रात गायब हो लेती थी और अपने बोय्फ्रेंड्स के साथ रंगरलियाँ मनाती थी। उनका कहना था जवानी को केवल पढ़ाई में बर्बाद करने से अच्छा है पढ़ाई के साथ इसका मजा लिया जाए। मुझे उनका बिंदास रहन-सहन भा गया। अक्सर मैं उन्हीं दीदी लड़कियों के रूम पर ही रहती थी। हर शनिवार की रात को दीदी लोग होस्टल में पार्टी करती थी और संडे को अपने बोयफ़्रेंड के साथ होटल में ऐश करती थी। मैं भी शनिवार को दीदी लोग के रूम पर इंजॉय करने चली जाती थी। दीदी लोग सेटरडे नाइट पार्टी में खूब शराब पीती थी, नॉनवेज मंगाती थी और फुलसाउंड म्यूजिक पर डांस करती थी। मुझे खूब मजा आता था दीदी लोग की पार्टी में।

पार्टी खत्म होने के बाद सब लोग शहाना दीदी के रूम में ब्लूफिल्म देखने बैठ जाते। मेरे लिए पार्टी का सबसे मजेदार हिस्सा यही होता था क्योकि शराब मैं बहुत ज्यादा नहीं पी पाती थी। लेकिन ब्लू फिल्म देखने के बाद मेरे तनबदन में आग लग जाती थी। मन करता कि कोई काश किसी मर्द का सानिध्य मिल जाए तो अपनी प्यास बुझा लूं। दीदी लोग तो अपने अपने बोय्फ्रेंड्स के साथ संडे को ऐश करने निकल लेती थी मगर मेरा तो तब तक कोई बोयफ़्रेंड ही नहीं था। मैं बोयफ़्रेंड बनाना भी नहीं चाहती थी क्योंकि मैं यह नहीं चाहती थी कि कॉलेज में दीदियों की तरह बदनाम हो जाऊँ।

हमारे ग्रुप में एक दीदी थी सारिका, उन्होंने भी इसी वजह से कोई बोयफ़्रेंड नहीं बनाया था। तो ग्रुप में मैं और सारिका दीदी जब संडे को होस्टल में अकेले रह जाते थे, तो हम लोग शहाना दीदी के लैपटॉप पर पिक्चर देख के एन्जॉय कर लेते थे।

एक बार की बात है, सेटरडे नाइट पार्टी के बाद सब लोग अपने अपने रूम में चले गए। मुझे नींद नहीं आ रही थी। ज्यादा शराब पी लेने की वजह से मुझे बार बार पेशाब लग रही थी। मैं रात में टोयलेट की तरफ जा रही थी तभी मैंने सारिका दीदी को मेस की तरफ जाते देखा। मैंने दीदी को आवाज़ दी। दीदी ठिठक कर रुक गई।

मैं उनके पास गई तो वो बोली- मुझे टोइलेट जाना है।

दीदी की आँखें देख कर मुझे लगा कि उन्हें ज्यादा चढ़ गई है।

मैं बोली- दीदी टाइलेट तो उधर है क्या मेस में सूसू करेंगी?

फिर मैं उन्हें सहारा देकर टाइलेट में ले गई। मैंने भी पेशाब की और फिर दीदी को लेकर उनके रूम में छोड़ा। फिर अपने रूम में वापिस आ गई। रूम में पानी नहीं था तो मैंने पानी की बोतल उठाई और मेस की ओर चल दी अक्वागार्ड का पानी लेने। मेस में मैंने देखा कि एक कमरे की लाईट जल रही थी और दरवाज़ा थोडा खुला था और अजीब सी सिसकारियाँ सुनाई दे रही थी।

मुझे कुछ अजीब सा लगा तो कौतूहलवश मैं उस कमरे की ओर चल दी। अंदर का नज़ारा देख के मुझे सारा माजरा समझ आ गया कि दीदी जानबूझ कर मेस में जा रही थी।

अंदर हमारी मेस के दो कुक और दो वर्कर सारिका दीदी और शहाना दीदी के साथ कामरत थे। वो नजारा देखकर मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। मैं वहीं खड़े होकर दीदी लोग को सेक्स का मजा लेते हुए देखने लगी। मैंने पानी पिया और बोतल जमीन पर रख दी। फिर अपने स्तनों और योनि को हाथों से रगड़ने लगी। मुझे भी उत्तेजना होने लगी। एक बार मन किया कि मैं भी अंदर जाकर सेक्स का भोग लगा लूं पर हिम्मत न कर सकी।

जब मुझसे बरदाश्त न हुआ तो मैं भाग के कमरे में आ गई और बिस्तर पर उस नजारे को याद करके अपनी योनि रगड़ने लगी। रात भर नींद न आई मुझे। मैंने सोच लिया कि सुबह दीदी से बात करुँगी कि मुझे भी एक बार मौका दिलवा दे।

सुबह मैं सारिका दीदी के पास गई और उनसे बोली कि दीदी मुझे भी एक बार मौका दिलवा दो प्लीज़।

दीदी ने मान लिया और बोली- चल आज रात तेरा भी मामला सेट कराती हूँ।

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दीदी ने संजय से मेरे लिए बात की, वो हमारी मेस में कुक था। दिन में जब मैं खाना खाने मेस में गई तो वो मुझे देख कर हल्के हल्के मुस्कुरा रहा था। मैं नासमझी में उसकी ओर देखने लगी तो उसने आँख मार दी तो मैंने शर्म से नज़रे झुका ली। खाना खाकर मैं जैसे ही रूम में पहुँची तो सारिका दीदी रूम में आई और बोली- तेरा भी मामला फिट हो गया मेरी बन्नो। आज शाम को मेस आफ है, तू सात बजे ही मेस चली जाना।

मेरे मन में आनंद की हिलोर उठ गई और मैंने खुशी से दीदी को चूम लिया।

दीदी बोली- बस कर, अभी से इतनी बेकरारी।

मैंने दीदी से कहा- दीदी आप भी रहोगी न मेरे साथ? मुझे अकेले डर लग रहा है।

थोड़ी न नुकुर के बाद दीदी मान गई। अब मुझे दिन इतना भारी लगे जैसे खत्म ही नहीं हो रहा है। मन कर रहा था अभी जाकर मेस में संजय से लिपट जाऊं।

मैंने बाथरूम में जाकर स्नान किया, जननांगों के बालों को साफ़ किया। जैसे तैसे दिन कट गया। शाम को प्यारी सी काले रंग की ब्रा पैंटी पहनी और ऊपर से मैक्सी पहन ली। दीदी का इंतज़ार करते करते आखें पथरा गई। आखिरकार दीदी रूम में प्रकट ही हो गई। उन्होंने टी-शर्ट और लोअर पहन रखा था। यह कहानी आप kolyaski-optom.ru पढ़ रहे हैं।

दीदी मुझसे बोली- चल फटाफट निकल।

हम दोनों मेस-हाल की तरफ चल दिए। मेस में घुसते ही मैंने देखा कि वहाँ हम लोगों का इंतज़ार भी बेकरारी से हो रहा था। एक वर्कर ने मेस का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया।

दीदी ने संजय को इशारा किया और फिर मेरे कान में बोली- मैं जा रही हूँ बगल वाले रूम में इन तीनो के साथ, तू संजय के साथ मौज कर। हम लोग रात 2-3 बजे यहाँ से वापस चलेंगे, ताकि सब लोग सो जाएँ और किसी को कानो-कान भनक भी न लगने पाए।

मैंने हामी में सर हिला दिया। दीदी ने मेरे गाल पर किस किया और बगल वाले रूम में चली गई। अब इस रूम में मैं और संजय अकेले थे। मैं शरमा रही थी, संजय ने मुझे बाहों में भर लिया और कसकर अपने बदन से चिपका लिया। यह पहली बार था जब किसी मर्द ने मुझे आलिंगन लिया था। मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। मेरे स्तनों में कसाव आ गया। संजय का उत्तेजित अंग मेरी योनि पर टकरा रहा था। उसके हाथ मेरी पीठ से होते हुए मेरे चूतड़ों के ऊपर रेंगने लगे। मैंने शर्म से अपना सर उसके सीने में दुबका लिया। संजय ने मेरी मैक्सी को उतार दिया, मैंने शरमा कर अपने स्तनों को हाथों से ढक लिया। फिर उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए। मैंने संजय का उत्तेजित लिंग देखा तो डर गई। उसका लिंग बहुत ही बड़ा और मोटा था।

संजय ने मुझे खाट पर लिटा दिया और फिर मेरे ऊपर चढ़ बैठा। उसने मेरे हाथों को स्तनों से हटा दिया और फिर अपने होठों को मेरे होठों से चिपका कर उन्हें चूसने लगा। मैंने शर्म से अपनी आँखे बंद कर ली मगर मैं उसका साथ देने लगी। मैं भी उसके होठों का रस पान करने लगी।

उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में दे दी और मैं भी बीच बीच में अपनी जीभ उसके मुँह में दे देती तो वो खूब कसकर मेरी जीभ को चूसता। इसी बीच वो अपने हाथों को ब्रा के ऊपर से ही मेरे स्तनों पर फिराने लगा। मेरी साँसें गहराने लगी। मेरी हालत अजीब सी हो गई, एक बार जी करता कि उसके हाथ पकड़ के रोक लूं, फिर जी करता कि ब्रा फाड़ के उससे कहूँ कि जोरजोर से स्तनों को भींचे।

और फिर संजय ने अपने हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरे बदन से जुदा कर दिया और मेरे स्तन न सिर्फ उसके सामने बेपर्दा हो गए, वो उसकी मजबूत हथेलियों में दबोच लिए गए। मेरे पूरे जिस्म में सनसनाहट होने लगी और जब जब संजय मेरे निप्पलों पर उँगलियाँ फिराता तो मेरा पूरा जिस्म सिहर जाता।

संजय के होठों ने मेरे होठों को छोड़कर अब निप्पलों को चूसना शुरू किया। अब तो मैं उत्तेजना के पर्वत का आरोहण करने लगी। मैं उसके सर के बालों में हाथ फिराने लगी। जब मुझे ज्यादा उत्तेजना होने लगती तो मैं उसके सर के बालों को खींच कर अपने निप्पल को उसके होठों से आजाद करा लेती मगर वो तुरंत ही दूसरे निप्पल को मुंह में ले लेता था।

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