दीदी की मचलती जवानी और मेरी नादानी

(Didi Ki Machalti Jawani Aur Meri Nadani)

यह देसी सेक्स कहानी है एक भाई बहन के बीच हुए वासना के उस आकर्षण की, जिसने प्रेम का रूप ले लिया. मेरा नाम अमित है, मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ. जब मैंने kolyaski-optom.ru पर इतनी सारी कहानियाँ पढ़ीं, तो मेरा भी मन किया कि मैं भी कुछ इन सब कहानियों से अनुभव लेकर अपनी कहानी भी लिखूँ.

मेरे घर में केवल 3 लोग हैं. पिता के गुजरने के बाद मेरी माँ को उनकी जगह नौकरी मिल गई. माँ के काम के चलते ज्यादातर समय हम दोनों भाई बहन घर पर अकेले रहते थे. मेरी दीदी का नाम नीतू है. di ki chudai उनकी उम्र 24 साल है, वो मुझसे ढाई साल बड़ी हैं. उनकी लम्बाई 5 फुट 4 इंच है, रंग गोरा है और भरा हुआ शरीर है. वो बहुत सेक्सी दिखती हैं. उनका फिगर 38-28-36 का है. उनकी अभी शादी नहीं हुई है. वो एकदम काम की देवी का रूप लगती हैं. उनकी बड़ी सी गांड इतनी जबरदस्त मटकती है, जब वो जीन्स पहनकर चलती हैं कि सब देखने वालों के लंड खड़े हो जाते हैं.

तो आप ये तो जान ही चुके हैं कि मेरी नीतू दीदी बला की खूबसूरत हैं.

दीदी मेरे साथ बहुत ही घुलमिल कर रहती थीं. हम दोनों अक्सर देर रात तक अकेले गप्पें मारते और मजाक करते रहते थे. दीदी के बारे में अपने दिल की एक बात बताऊँ.. तो वो मुझे बहुत अच्छी लगती थीं, पर उनको मैंने कभी गलत नजरिए से नहीं देखा था.

लेकिन उस दिन की घटना के बाद से दीदी के लिए मेरा नजरिया ही बदल गया. उस दिन दीदी अपनी सहेली की शादी में जाने के लिए तैयार हो रही थीं. जब वो तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आईं तो एक पल के लिए मेरी साँसें थम गईं.

गोरे बदन पे लाल रंग की साड़ी, जिसका पल्लू जालीदार था. जालीदार पल्लू होने की वजह से पूरा ब्लाउज साफ दिखाई पड़ रहा था. उभरी हुई छाती, गहरे गले का ब्लाउज पहने हुए दीदी एकदम मादक माल लग रही थीं. दीदी ने साड़ी नाभि के नीचे बांधी ताकि उनकी नाभि की रिंग एकदम साफ दिखाई दे. दीदी स्वर्ग की अप्सरा रंभा के समान लग रही थीं.

दीदी ने मुझसे उन्हें अपनी सहेली के घर तक छोड़ने को कहा. इतना कह कर दीदी आगे बढ़ गईं. जैसे ही मैंने पीछे से उनकी गदराई हुई गांड को ठुमकते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए.
मैं दीदी को छोड़ कर घर वापस आ गया.

रात के करीब दस बज चुके थे. माँ ने मुझे खाना दिया और अपने कमरे में सोने चली गईं. मैं खाना खाकर अपने कमरे में गया, पर मेरा ध्यान मेरी दीदी से हट ही नहीं रहा था. मैं उनके कमरे में गया, लाईट जलाई और सीधा उनके बाथरूम में घुस गया. बाथरूम में एक किनारे पे उनकी नाईटी रखी थी, जैसे ही मैंने उसको उठाया, उसमें से उनकी ब्रा और पैन्टी नीचे गिर गई. दीदी की ब्रा और पैन्टी को देख कर मुझपे मदहोशी सी छाने लगी. मैंने ब्रा और पैन्टी को सूंघा. सूंघते ही मुझे नशा सा होने लगा. मैंने पहली बार दीदी को सोचकर मुठ मारी और सारा मुठ उनकी ब्रा और पैन्टी पे गिरा कर सोने चला गया.

अगले दिन जब दीदी वापस आईं तो मैं सो रहा था. जब उठा तो फ्रेश हो कर नाश्ते की टेबल पे गया. दीदी पहले से ही वहां थीं और मुझे घूर रही थीं. मैं समझ गया कि दीदी ने ब्रा और पैन्टी में लगे मेरे मुठ को देख लिया है. दीदी ने कुछ नहीं बोला और अपने कमरे में चली गईं.

अब मैं अपनी दीदी को बहन की नजर से नहीं बल्कि एक जवान लड़की की नजर से देखने लगा. मेरा पूरा ध्यान अब दीदी पे ही रहने लगा. मैं उनकी जवानी की झलक पाने का कोई मौका नहीं गंवाता था. झाडू पोंछा करते वक्त जब वो झुकती थीं तो मैं उनकी चूचियों को गौर से देखता. शायद उन्हें भी पता था कि मेरा ध्यान उन्हीं पर है, इसलिए वो जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती थीं, जिससे मेरा ध्यान उन पर जाए.

माँ के बाहर काम करने की वजह से दीदी को आजादी मिल गई. अब वो और भी भड़कीले कपड़े घर में पहनने लगीं और अपनी मादक जवानी से मुझे सम्मोहित करने लगीं. मैं उनकी वासना को भड़काने के लिए रोज उनकी ब्रा पैन्टी में मुठ मारकर वैसे ही रख देता था. दीदी को भी और मुझे भी दोनों को पता था कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं.

एक दिन दीदी के रूम का एसी खराब हो गया, जिसकी वजह से उन्हें मेरे कमरे में सोने की वजह मिल गई. उनकी हवस से भरी आँखें साफ चमक रही थीं. माँ, दीदी और मैं खाना खाकर उठे. माँ को सुबह ऑफिस जाना था, इसलिए वो खाना खाकर सोने चली गईं. मैं भी अपने कमरे में चला गया. आधे घण्टे के बाद दीदी मेरे कमरे में आईं.

मैंने दीदी को देखा तो हैरान रह गया. उन्होंने एक काले रंग की पारदर्शी सिल्की फ्रॉकनुमा नाईटी, जो सिर्फ उनकी जाँघों तक आ रही थी.. उसे पहनी थी. उसके अन्दर की ब्रा और पैन्टी साफ साफ दिखाई दे रही थी. सिंगल बेड होने के कारण वो मेरे एकदम करीब आकर लेट गईं. दीदी के शरीर से निकलती मादक महक से मेरे लंड का बुरा हाल हो गया था. दीदी लेटते ही नींद के आगोश में चली गईं. पर उनके शरीर की खुशबू से मेरी नींद उड़ गई थी.

रात करीब एक बजे दीदी ने जब करवट बदली तो उनकी गदराई गांड मेरी तरफ थी. अब मुझसे काबू नहीं हुआ तो मैंने अपना लंड दीदी की गांड के पास कर दिया और धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा. दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
मैंने हिम्मत न होने के कारण आगे कुछ नहीं किया और सो गया. ऐसा करीब 3 दिन चलता रहा.

एक दिन मैंने कोशिश की, वो गहरी नींद में सो रही थीं. दीदी ने 2 पीस वाला गाउन पहना था और अन्दर ब्रा भी पहनी थी. रात के 2 बजे की बात है, मैं उठा और कमरे की लाइट जला दी. नीतू दीदी सो रही थी, उनकी चूचियां साफ दिखाई दे रही थीं. मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि वो मुझे देख ना लें, पर मैंने हिम्मत करके उनकी चूची पर हाथ रखा. पहले मैंने गाउन के ऊपर रखा.. फिर धीरे से दीदी की एक चूची दबाई और फिर दोनों हाथ से दोनों चूचियों को दबाने लगा. सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

अब मैंने उनके रसीले होंठों को चूमा, फिर उनकी गर्दन पर चूमा. इतने में मुझे लगा कि शायद दीदी जाग गई हैं और सोने का नाटक कर रही हैं. मुझे इससे और हिम्मत मिल गई, मैंने उनका गाउन नीचे से ऊपर किया, तो उनकी गोरी और चिकनी जांघें मुझे दिखने लगी थीं.

इतने में वो उठ गईं और बोल पड़ीं- यह क्या कर रहा है तू?
मेरे तो जैसे होश उड़ गए.
मैं बोला- दीदी, मैंने कभी किस नहीं किया, मुझे नहीं पता कि किस कैसे करते हैं.

पहले तो वे मुझे देखती रहीं फिर दीदी मुस्कुरा कर बोलीं- मुझे भी नहीं पता, आज करके देखते हैं.

यह कहानी आप kolyaski-optom.ru में पढ़ रहें हैं।

मैं दीदी के पास जाकर बैठ गया, दीदी ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. मैंने भी दीदी को बाँहों में ले लिया और उनके रसीले होंठों को चूमने लगा. लगभग 5 मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते रहे.

तभी एकदम से दीदी बोलीं- अमित, अब बस करो. मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है.
मैं समझ गया कि दीदी गर्म होने लगी हैं, मैंने कहा- दीदी, मुझे आपसे किस करके बहुत अच्छा लग रहा है.

वो कुछ नहीं बोलीं. मैंने फिर से उन्हें चूमना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि वो चुदवाने के मूड में आ गई हैं. मैं दीदी की चूचियों को जोर से मसलने लगा. दीदी के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैंने धीरे से दीदी की गाउन खोला और चूची चूसने लगा.

दीदी के कुछ भी न बोलने पर मैंने कहा- दीदी, गाउन उतार दो न प्लीज.
वो बोलीं- अमित मुझे डर लग रहा है, किसी को पता चल गया तो?
मैं बोला- दीदी कुछ नहीं होगा, किसी को पता नहीं चलेगा.

वो मान गईं. मैं दीदी की बुर सहलाने लगा, दीदी की बुर एकदम गीली हो चुकी थी, दीदी बोलीं- देखो अमित हम जो कर रहे हैं, ये सही नहीं है.
मैं कुछ नहीं बोला तो दीदी ने कहा- अब बस करो.

पर मैंने दीदी की एक न सुनी. उनको चूमने के बाद मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना 7 इंच का लंड निकाला तो दीदी के होश उड़ गए.

मैंने कहा- दीदी एक बार डालने दो.
दीदी बोलीं- इतना बड़ा.. मुझे मारना है क्या?
मैं बोला- तुम एक बार डलवाओ तो सही, कुछ नहीं होगा.

दीदी के मन में उत्सुकता और डर दोनों था. मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और अपना लंड उनकी बुर में धीरे धीरे डालने लगा. वो दर्द से कसमसाने लगीं. फिर मैं जोर जोर से झटके मारने लगा. दीदी चीखने लगीं. मैंने उनके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया ताकि माँ को न सुनाई दे.

दीदी कराहते हुए बोलीं- बस करो, बहुत तेज दर्द हो रहा है.
लेकिन मैं कहाँ सुनने वाला था. मैं दीदी की चूत में लंड पेलता चला गया. दीदी की सील टूट गई थी. दीदी की बुर से हल्का हल्का खून निकल रहा था. मैं उनको हचक कर चोदने लगा. दीदी भी मस्ती से चुदवाने लगी थीं

अभी 15 मिनट हुए थे कि मेरा सारा जोश दीदी की बुर में निकल गया. मैं हांफता हुआ दीदी की चूचियों पर गिर गया. दीदी भी झड़ चुकी थीं.

फिर मैंने दीदी की नाभि को चूमना शुरू किया. नाभि को चूमने से दीदी फिर से गरम हो गईं और उन्होंने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया, जिससे हम दोनों दुबारा चुदाई के लिए तैयार हो गए. फिर दीदी ने मुझे लेटने को कहा और खुद अपनी गांड के छेद को मेरे लंड पर रख कर अपनी गांड मरवाई. शायद दीदी पहले भी किसी से गांड मरवा चुकी थीं.

जब मैंने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि नहीं मैंने अभी तक किसी से गांड नहीं मरवाई है, वो तो ब्लू-फिल्म देखते हुए मैंने मूली वगैरह से अपनी गांड को ढीला कर लिया था.
मैंने पूछा कि चूत में मूली क्यों नहीं की?
तो बोलीं- मैं चूत की सील लंड से ही खुलवाना चाहती थी.

अब मैं बेफिक्र होकर दीदी की गांड मारने लगा. मुझे उनकी चूत से ज्यादा मजा गांड मारने में आ रहा था.
करीब दस मिनट के बाद दीदी की गांड में ही मेरा पानी निकल गया और हम दोनों उसी तरह एक दूसरे से लिपट कर सो गए.

इसके बाद तो माँ के ऑफिस जाने के बाद दीदी और मैं नंगे ही घर में चुत चुदाई का सुख भोगने लगते थे.

ये मेरी सच्ची चुदाई की देसी कहानी है, आपको कैसी लगी.. प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.

 

kolyaski-optom.ru में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!


"chut me land""office sex stories""sex story real hindi""chudai ki real story""sagi bahan ki chudai ki kahani""chudai ka nasha""uncle sex stories"desisexstories"group chudai kahani""dudh wale ne choda""hot chachi story""sex story didi""www hindi sexi story com""antar vasana""sexy hindi kahaniy""latest hindi sex stories""mausi ko pataya""sexy stroies""sister sex stories""chudai ki kahani""aunty ke sath sex""wife ki chudai""sexy sex stories""chachi ki chudae""desi suhagrat story""teacher ko choda""hot store hinde""sex stories""behen ki cudai""boobs sucking stories""saxy kahni""xxx hindi stories""aunty ki gaand""meri chut ki chudai ki kahani""chodai k kahani""neha ki chudai""meri chut me land""behan ki chudayi""cudai ki kahani""xxx stories indian"gandikahanihotsexstory"antarvasna gay stories""sexi sotri""raste me chudai""hindi ki sexy kahaniya""neha ki chudai""apni sagi behan ko choda""www new chudai kahani com""bhabhi ki chudai ki kahani hindi me""हिंदी सेक्स कहानी""train me chudai"chudaistory"grup sex""sex stories mom""sx stories""hindi lesbian sex stories""kamukta story""indian saxy story""hindi sax storis""hindi sexy storis""pahli chudai"sexstorie"bhai ke sath chudai""massage sex stories""indian hot sex story""devar bhabhi ki sexy kahani hindi mai""sexy story hindy""सेक्स स्टोरी इन हिंदी""hindi saxy khaniya""hindi chudai ki story""behan ki chudai sex story""sister sex story""neha ki chudai""hot sex story""tanglish sex story""devar bhabhi ki sexy story"